हसने की बात ना करो...



हसने की बात ना करो हमसे
हमने जाने कब से टूटे ख़्वाबों का बोझ उठाया है
मुस्कुराना है जिंदगी, हमें भी पता है
इसीलिए तो अश्कों को छिपाया है

तुम क्या जानो  गहराइयों में दिल के -
क़ैद है जाने कैसे कैसे अरमान कई
के उस जगह को तो हमने खुद से भी छुपाया है.