---


कभी खुशियों से लहरा उठी राहें
तो कभी गम को सीने से लगाकर चलते रहे
जितनी भी जी ज़िन्दगी हमने
कोशिश तो यही की के सच्चाई से जीते रहे

सीखा बहुत कुछ...
देखा वो भी जो शायद ना देखते तो अच्छा होता
खामोशी को समझा कभी
तो कभी बहुत कुछ सुनकर भी कुछ समझ ना सके

आये बहुत लोग ज़िन्दगी में
आये और चले गए
कुछ रेत की तरह थे -
हाथ से निकलकर भी जो थोडी रह जाती है हथेली पर
कुछ लोग आये जिनका कुछ भी ना बचा
खो गए काफूर की तरह
कुछ लोग चुभे आँखों में तिनके की तरह
कुछ लोग लबों की मुस्कराहट बनकर रह गए

Books by Arti Honrao

Depression is REAL

Scroll through and click on image to read