नज़दीकियाँ ...


उन्होंने लिया कुछ इस कदर आगोश में
सारे ज़ख्मों को मरहम लगा दिया
उनके सीने पे रख कर सर जो सोयी कुछ पल
गुजरी हुई तमाम रातों की नींद ने पलकों को चूम लिया
जो गुजारी थी कभी उनके दीदार के इंतज़ार में
अब जाके वोह रातें उनके नाम हुई
घुल गयी साँसे इस कदर इक-दुसरे की साँसों में
ना उनका कुछ रहा ना रहा कुछ मेरा
खो गए दोनों इक-दुसरे में, दुनिया से अनजान हुए
वो खोये रहे जुल्फों में मेरी
और मैं उनकी मुस्कराहट की दीवानी हुई

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Books by Arti Honrao

Depression is REAL

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