उन्होंने लिया कुछ इस कदर आगोश में
सारे ग़मों को मरहम लगा दिया
उनके सीने पे रख कर सर जो सो गई कुछ पल
गुज़री हुई तमाम रातों की नींद ने पलकों को चूम लिया
जो गुज़री थी कभी उनके दीदार के इंतज़ार में
अब जाके वो रातें उनके नाम हुई
घुल गई साँसें इस कदर इक-दूसरे की साँसों में
ना उनका कुछ रहा ना रहा कुछ मेरा
खो गए दोनों इक-दूसरे में, दुनिया से अनजान हुए
वो खोए रहे झुल्फों में मेरी
और मैं उनकी मुस्कुराहट की दीवानी हुई.
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