जा जा कर दूर मुझसे कितनी दूर जाओगे
एक दिन लौट के मेरे ही क़रीब आओगे
सैकड़ों तितलियों पे मंडराओगे
पर मेरे ही आगोश में चैन पाओगे.
जिस गली से भी गुज़रोगे
मुझे अपने साथ पाओगे
कई राहों पर तुम चलोगे
हर मंजिल पर मुझे ही खड़ा पाओगे
मुश्किलें आयेंगी हज़ारों
लड़ - लड़ के कभी जो तुम थक जाओगे
तुम्हें आराम देने के लिए तभी
मेरा आँचल अपने पास पाओगे
जब भी तोड़ देगा कोई तुम्हारा दिल
अपना दर्द तुम बताना चाहोगे
उस वक्त जरा मुड़कर देखना
साये की तरह मुझे पीछे खड़ा पाओगे.
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