मैं अपनी कहानी सुनाती रही
वो अपने गीत गाता रहा
रात भर बारिश होती रही
छत से आँसू टपकता रहा
आवाज़ें कहीं दूर से आती रहीं
पास का सन्नाटा डराता रहा
उसके लबों पे मुस्कुराहट सजी रही
मेरे चेहरे का ग़म छिपा रहा
मैं अपनी कहानी सुनाती रही
वो अपने गीत गाता रहा
उसकी कही हर बात दिल तक पहुँचती रही
मैंने लिखा आँखों का अश्क मिटाता रहा
मैं अपने हाथों की लकीरों को देखती रही
वो मेरा हाथ पकड़ने की कोशिश करता रहा
रात भर बारिश होती रही
छत से आँसू टपकता रहा
खुशियाँ दस्तक देती रहीं
ग़म डेरा डाले बैठा रहा
दिलों में दूरियाँ कायम रहीं
साँसों का संगीत गूँजता रहा
मैं अपनी कहानी सुनाती रही
वो अपने गीत गाता रहा
रात भर बारिश होती रही
छत से आँसू टपकता रहा
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