बातें करते हैं सभी, काम कोई नहीं आता...
सफ़र है तन्हा अपना, साथ कोई देता नहीं ।
चलो, गिरो, गिरकर खुद संभल जाओ
कोई उठाएगा तुम्हें, उम्मीद ये करना नहीं...
सफ़र है तन्हा अपना, साथ कोई देता नहीं ।
अपने-अपने झमेले हैं, गुम है दुनिया सारी अपने ही झमेले में
पड़ी हैं हथकड़ियाँ सभी के हाथों में ...
कोई तुम्हारी हथकड़ी छुड़ाएगा, उम्मीद ये करना नहीं।
सफ़र है तन्हा अपना, साथ कोई देता नहीं ।
चलो, गिरो, गिरकर खुद संभल जाओ
कोई उठाएगा तुम्हें, उम्मीद ये करना नहीं...
तें करते हैं सभी, काम कोई नहीं आता...
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