कुछ पल


बाहों में ले लो मुझे
के आज मैं बहुत थक गयी हूँ
हौसला दो मुझे, कानो में हलके से कुछ कहो
के आज मैं बहुत अकेला महसूस कर रही हूँ

बहुत सताया है ज़माने ने मुझे
तुम्हे पता है, आज मैं बहुत रोई हूँ?
तुम्हारी बाहों में आके कुछ पल सोना चाहती हूँ
के पता नहीं कबसे मैं चैन की नींद सोयी नहीं हूँ

अपने लब ज़रा रख दो मेरे लबों पर
किसी की हूँ मैं, ज़रा यह एहसास होने दो
जख्दे रहो बाहों में मुझे
मुझे प्यार करो, मैं चाहूं भी तो मुझे जाने ना दो

आज सब कुछ भूलकर तुम्हारी बन जाना चाहती हूँ
आज हारकर जीतने का सुख उठाना चाहती हूँ
बाहों में ले लो मुझे
के आज मैं बहुत थक गयी हूँ.