याद आते हैं वो दिन जब कलम नहीं था हाथ में
पेंसिल से लिखा करते थे
बचपन था ऐसा वो जब गलतियाँ भी हम
रबर से मिटाया करते थे
अब तो
कलम से लिखा गया मिटाते मिटता नहीं
आँसुओं से भले ही धुंधले हो जाएँ अक्षर...
उनके निशान मगर दिल से मिटते नहीं।
there are moments when dreams continue even after waking up moments when reality still plays - peek-a-boo with the sleepy eyes i call it the...