क्यूँ आखिर



क्यूँ आखिर कोई ऐसे दिल के करीब आता है 
क्यूँ आखिर कोई ऐसे आँखों में आंसू छोड़ जाता है 
वक़्त लगता नहीं जब किसी को अपना बनाने में 
क्यूँ उसी को भुलाने में वक़्त लग जाता है  
बस मुस्कुराते रहो, भले ही अश्क  चुभते हो आँखों में  
क्यूँ आखिर दुनिया में दर्द छिपाना पड़ता है 
कभी तो रो लेने दो जी भर के, कमसेकम दर्द कुछ हल्का तो हो 
क्यूँ आखिर मुस्कुराकर कमज़ोर ना होने का दिखावा करना पड़ता है?