पेहली नज़र


आँखों से होकर दिल में उतर गयी 
वो नज़र तेरी दीवाना बना गयी 
एक ही नज़र में मानो सब हार बैठी मैं 
जाने कैसे तुझसे मुहोब्बत कर बैठी  
तुने कुछ कहा नहीं, न मैं कुछ कह सकी 
धड़कने तेज़ हुई पर करीब से मुलाक़ात न हो सकी 
वो लम्हा आया और चला गया साँसों में मेरी, तेरी याद छोड़ गया  


फिर कब मिलोगे तुम? के फिर कब धड़कने तेज़ होंगी?
पास भी आओगे या यूँ दूर से ही मुलाकातें होंगी? 
क्या साँसे घुलेंगी कभी साँसों में? क्या कभी बाहों में बाहें होंगी? 
या यूँ ही आकर तुम चले जाओगे? हर बार मन में एक आस छोड़ जाओगे? 
 खड़ी हूँ मैं आज भी, इंतज़ार कर रही हूँ 
आओगे तुम कभी तो, जानती हूँ 
आ जाओ, के अब दिल बेहेलता नहीं 
नज़रें हैं के अब तुझे देखे बिना रह सकती नहीं
 इस बार आओगे तो तुम्हे जाने नहीं दूंगी 
आँखों से होकर तेरे दिल में उतर जाउंगी