क्या बॉस...?


कभी जब अचानक से
ज़िन्दगी के सफ़र में
भागदौड़ के माहोल में
एक पुराना दोस्त आकर हलके से
काँधे पर हाथ रखकर पूछता है
"क्या बॉस, क्या हो रहा है लाइफ में?"
जाने क्यूँ उस वक़्त
आँखें भर आती है

क्यूँ अचानक से पुरानी यादें
देती है दस्तक दिल के दरवाज़े पर
पुरानी यादों में से कुछ गीत
बझने लगते हैं कहीं दूर बक्क्ग्रौन्द में
"पुरानी जीँस और गीटार"
के शब्द नाम कर जाते हैं पलकें -
उन लड़कों के भी जो शायद रोये थे सिर्फ बचपन में

आज भी जब कहीं बजते हैं कुछ ख़ास गाने
कहीं किसी पार्टी में, या फिर रेडियो पर,
रोंगटे खड़े हो जाते हैं
पलकें भीगती हैं, भीग जाती है दिल की ज़मीन
यादों की बौछार होती है जब
जाने क्यूँ सब अच्छा सा लगने लगता है
ऐसे महसूस होता है के -
मानो वो पल फिर से ज़िन्दगी का हिस्सा बन रहे हैं
फिर एक दूसरी दुनिया बन जाती है
इस भागदौड़ की दुनिया से परे

जब अचानक से कोई पुराना दोस्त
काँधे पर हाथ रखकर पूछता है
"क्या बॉस, क्या हो रहा है लाइफ में?"
तब ज़बान पर एक ही जवाब आता है -
"बस यार, तू आ गया तो लाइफ रंगीन हो गयी!"

Books by Arti Honrao

Depression is REAL

Scroll through and click on image to read