तुम लौट आओगे...


जा जा के दूर मुझसे कितनी दूर जाओगे
एक दिन लौट के मेरे ही करीब आओगे
सैकडों तितलियों पे मंड्राओगे
पर मेरी ही आगोश में चैन पाओगे

जिस गली से भी गुजरोगे
मुझे अपने साथ पाओगे
कई राहों पे तुम चलोगे
पर मन्ज़ील पे मुझे ही खडा पाओगे

मुश्किलें आएँगी हजारों
लड़-लड़के कभी जो तुम थक जाओगे
तुम्हे आराम देने के लिए तभी
मेरा आँचल अपने पास पाओगे

जब भी तोड़ देगा कोई तुम्हारा दिल
अपना दर्द तुम बाँटना चाहोगे
उस वक़्त ज़रा मुड़कर देखना...
साए की तरह मुझे पीछे खडा पाओगे

Guestbook for Straight from the Heart and You Me & Stories