मैं मेरी कहानी सुनाती रही


मैं मेरी कहानी सुनाती रही
वो अपने गीत गाता रहा
रातभर बारिश होती रही
छत से आँसू टपकता रहा

आवाजें कहीं दूर से आती रही
पास का सन्नाटा डराता रहा
उसके लबों पे मुस्कराहट सजी रही
मेरे चेहरे का गम छिपा रहा

मैं मेरी कहानी सुनाती रही
वो अपने गीत गाता रहा

उसकी कही हर बात दिल तक पहुँचती रही
मैंने लिखा आँखों का अश्क मिटाता रहा
मैं अपने हाथों की लकीरों को देखती रही
वो मेरा हाथ पकड़ने की कोशिश करता रहा

रातभर बारिश होती रही
छत से आँसू टपकता रहा

खुशियाँ दस्तक देती रही
गम डेरा डाले बैठा रहा
दिलों में दुरी कायम रही
साँसों का संगीत गूंजता रहा

मैं मेरी कहानी सुनाती रही
वो अपने गीत गाता रहा
रातभर बारिश होती रही
छत से आँसू टपकता रहा

- आरती होनराव
०७/१२/२०१० - २३:५५