कविता..

एक कविता लिखी है तुम पर
तुम्हे कैसे सुनाऊ?
तुम्हारे आते ही धड़कने तेज हो जाती है
इस दिल को कैसे समझाऊ?

तुम्हे देख के खिल उठता है मन,
क्या करू?
आँखों में कैद है तस्वीर तुम्हारी
उस तस्वीर को कैसे मिटाऊ?

बैठी हु यहीं, यूँही, घंटो से -
तुम्हारे आने का इंतज़ार करते हुए
तुम्हारे ही कमरे में,
तुम्हारी ही मेज़ पर रखे पर्चे पर दिल का हाल बया करते हुए.
बैठी हु यहीं, के तुम आओगे और समझ जाओगे..
पढ़कर मेरी लिखी कविता, ख़ुशी से मुस्कुराओगे -
लगाकर मुझे प्यार से गले, अपने दिल का हाल सुनाओगे..
बैठी हु यहीं, यूँही -
उम्मीदों का महल हवाओं में बांधते हुए..
तुम्हारा इंतज़ार करते हुए.

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Guestbook for Straight from the Heart and You Me & Stories